एक तू ही भरोसा... एक तू ही सहारा...
इस तेरे जहाँ में॥ नहीं कोई हमारा॥
हे इश्वर, या अल्लाह॥ यह पुकार सुन ले॥ हे इश्वर या अल्लाह हें दाता॥
नादाँ हैं हम तो मालिक॥ क्यूँ दी हमें यह सज़ा
यहाँ है सभी के दिल में नफरत का ज़हर भरा॥
इन्हें फिर से याद दिला दे सबक वही प्यार का...
बन जाए गुलशन फिर से काँटों भरी दुनिया...
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